राजस्थान, एमपी एवं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की पराजय का सटीक विश्लेषण

जिस तरह से एमपी,राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी को बुरी तरह से पराजय का सामना करना पड़ा है उसके लिए पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा की संगठन शक्ति से कहीं ज्यादा मैं कांग्रेस की सवर्ण मानसिकता वाली सोच,कथनी करनी में दोगलापन दिखाते हुए ओबीसी दलित वर्गों को टिकट वितरण में समुचित भागीदारी न देना,कमलनाथ द्वारा अखिलेश यादव सहित अन्य क्षेत्रीय दलों को भागीदार न बनाकर बड़बोलेपन से अपमान करना ,पूर्व निर्धारित इंडिया गठबंधन की सर्वदलीय रैली न होने देना एवं ब्राह्मणवादी मानसिकता का परिचय देते हुए खड़गे जैसे अपने ही दलित कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को उचित सम्मान न देकर केवल राहुल प्रियंका सहित केवल सवर्ण नेताओं को ही हाईलाइट करना ,सम्मान देना एवं बागेश्वर धाम वाले बाबा द्वारा कथा पूजन करवाकर ब्राह्मणवादी पाखंडवादी मानसिकता को वरीयता देने को ही मानता हूं।

राहुल गांधी एक तरफ जातीय जनगणना एवं सबकी भागीदारी की बात करते है लेकिन इन तीनो राज्यों में इन्होंने ओबीसी दलित आदिवासियों को टिकट वितरण में न तो उचित भागीदारी दिया और बड़ी पार्टी होने के दंभ में न तो सपा बसपा जैसे छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन किया जिससे गठबंधन वोटों का विभाजन होने से कांग्रेस को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है।

सवर्ण नेताओं के वर्चस्व वाली कांग्रेस एवं भाजपा की सवर्ण मानसिकता में कोई अंतर नही है दोनो बहुजन नेतृत्व वाली क्षेत्रीय पार्टियों को आगे बढ़ते व मजबूत होते नही देखना चाहते है।इसलिए दोनो पार्टियों को बुनियादी सोच में कोई फर्क नहीं है।कांग्रेस के इसी सोच की वजह से अगर इसको भाजपा की बी टीम कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा।विगत दिनों में अशोक गहलोत ने भी बसपा विधायको को भागीदारी न देकर उन्हें लालच देकर अपने दल में शामिल करवा लिया था।

इस चुनाव में राहुल गांधी चाहे जातिगत जनगणना एवं सब की जन संख्या के अनुपात में भागीदारी पर चाहे जितना बोले हो लेकिन इनके क्षेत्रीय नेता कहीं कही हिंदुत्व का कार्ड भी खेलते नजर आए,कमलनाथ तो बागेश्वर बाबा से मिले भी ,सैगोल का पूजन करने वाले ब्राह्मण से कथा पूजन भी करवाया जिससे जनता में भ्रम की स्थिति बनी रही और पूरा गठबंधन इस चुनाव में बिखरा ही नही अपितु एक दूसरे के विरुद्ध लड़ता हुआ नजर आया।

इन चुनावों में कांग्रेस की बुरी हार का सकारात्मक पहलू यह है कि कांग्रेस को अपनी यथास्थिति का पता चल गया है।इसलिए सुधार की बहुत गुंजाइश है कमियों से सबक लेते हुए सभी बहुजन क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल करके जातिगत जनगणना,जन संख्या के अनुपात में सभी वर्गो को हर क्षेत्र में भागीदारी ,बेरोजगारी,शिक्षा, स्वास्थ,निजीकरण,भ्रष्टाचार ,संविधान सुरक्षाआदि जनहित मुद्दों को  मुख्य मुद्दा बनाकर आगे आने वाले लोक सभा चुनाव की तैयारी में लग जाना चाहिए।जिस तरह से भाजपा अपने क्षेत्रीय दलों को भागीदारी दे रही है उसी तरह इंडिया गठबंधन को भी सपा,बसपा,आजाद समाज पार्टी,आम आदमी पार्टी एवं अन्य तमाम छोटे दलों को समुचित भागीदारी देकर नीतीश कुमार,खड़गे, मायावती,  स्टालिन जैसे परिपक्व लोगो के नेतृत्व में रणनीति बनाकर मोदी जी का सामना करना चाहिए अन्यथा इसी तरह पराजय का सामना करना पड़ेगा।यह कार्य कठिन अवश्य है लेकिन असंभव नहीं।


✍️✍️✍️ एड. श्री नाथ मौर्य रिट. डीएसपी

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